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Showing posts from October, 2018

Thoughts in hindi

पङते है पैर जिनके घमंड से           जमीं पर अक्सर उनके बच्चे फिसड्डी        निकला करतें है *** दूनियां में पाना कुछ भी      असंभव नही है बस जरूरत है 100% मेहनत     और ईमानदारी की *** जो अपनें में कमी देखता उसे पहले खुद          से जीतना चाहिए अपने से हारा परींदा उङान भरने की          नहीं सोच सकता *** कश्ति को किनारे पर लगाना है तो            दिशा बदल लो लहरों का तो स्वभाव ही उछाल भरकर           आगोश मे लेना है ***     बुराई उसमें नही है जो आपको कहता है        आप कुछ नहीं कर सकते बुराई तो आप में है जो उसकी बात मानकर        अपना मनोबल तोङ लेते हो *** अच्छाई ओर बुराई आपके आस-पास            हर जगह मिलेगी वो आपकी सोच पर निर्भर करती है आपने           क्या हासिल किया *** समाज...

हिंदी गजल / अनिता गहलावत शायरी

टुकङों में नही जिया जाता हर दर्द पूरा जीने की हिम्मत जुटानी पङती है फिर भी अच्छे खासे चैन गवा कर मंजिलो से हारे मौहब्बत में ढह कर दिल ढूंढते है  हर चाहत आईना दिखाकर  उल्फत की दिवार बन जाती है निगाहो में बसा है दिवानों का खजाना मिलते ही हालत हीं हया हो जाती है रूकसद न हुआ मुझसे तेरा रूठ जाना जर्रे जर्रे में छिपी है एक प्यारी सी आह किसी को अपना बना ले किसी से दिल लगाकर भी खफा हो जाती है जिदंगी बनती है संवरती है प्यार से उमंगे भरी है आश है हर लम्हें में करवटों से पङी सिलवटे कहती है जिये तो जिये कैसे ये खुशनुमा जिदंगी हसरत चिराग बुझने नहीं दे रही है अब तो हर तन्हाई खामोश जहर लगे 🌹 ग़ज़ल 2:  “उसकी ख़ामोशी” (अधूरे प्यार पर) ✍️ लेखिका: Anita Gahlawat उसकी ख़ामोशी भी कुछ कहती थी, हर चुप्पी में दर्द बहती थी। लब खामोश, पर आंखें बग़ावत में थीं, जैसे मोहब्बत वहीं रहती थी। मिलना तो हर रोज़ होता था, पर दिलों में दूरी सी रहती थी। वो साथ था फिर भी तनहा था, हर बात अधूरी सी लगती थी। मैं समझा नहीं वो इशारे कभी, और वो हर रोज़ थकती थी। अब जब नहीं है वो साथ मेरे, उसकी याद बहुत...

व्यवहार

दिल का क्या ये तो शोला है कभी चांदी सा कभी सोने सा कभी फोलाद का है पर समय समय पर वक्त के साथ बदलता जरूर है दोस्तों कभी ॐच नीच का घमंड मत करना कब कोइ क्या कर जाये इसलिये किसी को छोटा मत समझना स्वभाव और व्यवहार हसंमुख रखोगे तो इज्जत पाओगे अगर कोइ शख्स आपको अच्छा लगे तो उसमें कोई अच्छाई होती है जरूर बातचीत और इज्जत करने और कराने के भी तरीके हैं आपको लग रहा है मैं सीनियर हूं या मैं सामने वाले का बोस हूं बस आप स्माईल किजिये सामने वाले के चेहरे पर भी मुस्कान होगी और अभिवादन स्वाभाविक होगा गरूर में रहोगे तो दरकिनार रहोगे अपनों से भी और परायों से भी किसी से रूबरू होना है तो गुफ्तगु किजिये किसी का साथ पाना है तो अहम को हटाइये ना तो कई लोगों को सर्कस का शेर भी शिकारी लगता है समझ के आईने जब तस्वीर दिखातें हैं तो सच्चाई से रूबरू कराते हैं यू तो मिल जाते है हजारो लोग पर किसी किसी चेहरे में पता नहीं क्या बात होती है दिल में उतर आतें हैं ये प्रकृति बङी हसीन है यहां रहस्यों की दूनियां है प्यार- प्रेम का अबर है बिना इसके सब सुनसान है मन की दरिया मचल...

बेटी का खत

आज फिर लफजो ने  भीगे मन से साज सजाया है बङे दिनों के बाद एक पुराना खत सामने आया है एक बेटी ने अपने पापा को लिखा था खत कभी अच्छी पढाई करने का वादा लिया था तभी पढकर खत एक पल थम सा गया दिल ठहर गया लाख कोशिशों से छलकती आंखो पर काबू पाया है आज रह रह कर बङे जत्नों से दिल को समझाया है लिखावट भी शुद्ध नहीं लिखी है वाक्य भी आधे-अधुरे कौइ ओर पढता तो कब का फेंक देता पापा ये खत पर आपने संभाला ऐसे जैसे परोपर्टी के पुराने कागजात समझ कर पापा आपने पढा होगा वाक्य वक्त से जोङे होंगे समय सीमा से शब्दों को बांधकर खुशी से फुले न समाये होंगे खत आया है बेटी का कहकर कई बार टुटे फूटे शब्द पढे होंगे आज आसुं मेरे छलके है उस दिन आपने बहाये होंगे कही मुझे आपका पता मिला होगा तभी चिट्ठी लिखी होगी लिखाई से लग रहा है  किसी बङे से मदद नहीं ली होगी इतना तो याद है आपके पास कक्षा तीसरी में खत लिखा था भूल गई थी सब लिखा हआ, अब पढा है क्या क्या लिखा था मां, दादी चाचा ताऊ बुआ और भाई- बहन  सब ठिक  हैं भाई के पैदल चलने का जिक्र है ,क्या दिन थे सब  ठिक हैं बात 1994 की है जब आपकी सि...