बेटी का खत
आज फिर लफजो ने भीगे मन से साज सजाया है
बङे दिनों के बाद एक पुराना खत सामने आया है
एक बेटी ने अपने पापा को लिखा था खत कभी
अच्छी पढाई करने का वादा लिया था तभी
पढकर खत एक पल थम सा गया दिल ठहर गया
लाख कोशिशों से छलकती आंखो पर काबू पाया है
आज रह रह कर बङे जत्नों से दिल को समझाया है
लिखावट भी शुद्ध नहीं लिखी है वाक्य भी आधे-अधुरे
कौइ ओर पढता तो कब का फेंक देता पापा ये खत
पर आपने संभाला ऐसे जैसे परोपर्टी के पुराने कागजात
समझ कर पापा आपने पढा होगा वाक्य वक्त से जोङे होंगे
समय सीमा से शब्दों को बांधकर खुशी से फुले न समाये होंगे
खत आया है बेटी का कहकर कई बार टुटे फूटे शब्द पढे होंगे
आज आसुं मेरे छलके है उस दिन आपने बहाये होंगे
कही मुझे आपका पता मिला होगा तभी चिट्ठी लिखी होगी
लिखाई से लग रहा है किसी बङे से मदद नहीं ली होगी
इतना तो याद है आपके पास कक्षा तीसरी में खत लिखा था
भूल गई थी सब लिखा हआ, अब पढा है क्या क्या लिखा था
मां, दादी चाचा ताऊ बुआ और भाई- बहन सब ठिक हैं
भाई के पैदल चलने का जिक्र है ,क्या दिन थे सब ठिक हैं
बात 1994 की है जब आपकी सिक्किम में बटालियन थी
अब कहां इतने लोग इकट्ठे रहते हैं तब तो दादी भी थी
जब आप कारगील में थे तब मैं कुछ समझदार हो गई थी
श्री अटल विहारी जी की भाषण बाजी सबके हौसले भरती थी
मेरी मां तो मां दिलेर दादी भी आपके खत की बांट जोहती थी
पर पापा मेरे आदर्श हिरो तो आप ही थे ,हो और हमेशा रहोगे
सेना का हिस्सा बनकर भारत मां की सेवा निडरता से की है
महिनों दूर रह कर एक अच्छे पापा की भूमिका अदा की है
आपके हर खत और हर बात में मेरी पढाई की चिन्ता थी
मैं नहीं कर पाई उतना कुछ जितनी आपको चाहत थी
माफ करना पापा ये बात समय पर समझ नहीं आई थी
पढाया लिखाया खूब आपने बेटीयों को ,बेटीयां नही कम
जिगरा था आपके पास दूनियां से अलग और बाजूओ में दम
बेटियों को काबिल बनाया है नारा तो बाद में आया है
शुक्रिया भगवान आपका मैनें इतना दिलेर पापा पाया है
बङे दिनों के बाद एक पुराना खत सामने आया है
एक बेटी ने अपने पापा को लिखा था खत कभी
अच्छी पढाई करने का वादा लिया था तभी
पढकर खत एक पल थम सा गया दिल ठहर गया
लाख कोशिशों से छलकती आंखो पर काबू पाया है
आज रह रह कर बङे जत्नों से दिल को समझाया है
लिखावट भी शुद्ध नहीं लिखी है वाक्य भी आधे-अधुरे
कौइ ओर पढता तो कब का फेंक देता पापा ये खत
पर आपने संभाला ऐसे जैसे परोपर्टी के पुराने कागजात
समझ कर पापा आपने पढा होगा वाक्य वक्त से जोङे होंगे
समय सीमा से शब्दों को बांधकर खुशी से फुले न समाये होंगे
खत आया है बेटी का कहकर कई बार टुटे फूटे शब्द पढे होंगे
आज आसुं मेरे छलके है उस दिन आपने बहाये होंगे
कही मुझे आपका पता मिला होगा तभी चिट्ठी लिखी होगी
लिखाई से लग रहा है किसी बङे से मदद नहीं ली होगी
इतना तो याद है आपके पास कक्षा तीसरी में खत लिखा था
भूल गई थी सब लिखा हआ, अब पढा है क्या क्या लिखा था
मां, दादी चाचा ताऊ बुआ और भाई- बहन सब ठिक हैं
भाई के पैदल चलने का जिक्र है ,क्या दिन थे सब ठिक हैं
बात 1994 की है जब आपकी सिक्किम में बटालियन थी
अब कहां इतने लोग इकट्ठे रहते हैं तब तो दादी भी थी
जब आप कारगील में थे तब मैं कुछ समझदार हो गई थी
श्री अटल विहारी जी की भाषण बाजी सबके हौसले भरती थी
मेरी मां तो मां दिलेर दादी भी आपके खत की बांट जोहती थी
पर पापा मेरे आदर्श हिरो तो आप ही थे ,हो और हमेशा रहोगे
सेना का हिस्सा बनकर भारत मां की सेवा निडरता से की है
महिनों दूर रह कर एक अच्छे पापा की भूमिका अदा की है
आपके हर खत और हर बात में मेरी पढाई की चिन्ता थी
मैं नहीं कर पाई उतना कुछ जितनी आपको चाहत थी
माफ करना पापा ये बात समय पर समझ नहीं आई थी
पढाया लिखाया खूब आपने बेटीयों को ,बेटीयां नही कम
जिगरा था आपके पास दूनियां से अलग और बाजूओ में दम
बेटियों को काबिल बनाया है नारा तो बाद में आया है
शुक्रिया भगवान आपका मैनें इतना दिलेर पापा पाया है
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अगर आपको मेरा लिखा हुआ अच्छा लगे या कोई सुझाव देना हो तो कृपा आप कमेंट करें । धऩ्यवाद ।