Posts

Showing posts from August, 2017

बाबागर्दी

भारतीय संस्कृति अपने में ‌महान है ‌इसमें ‌कोई ‌दो ‌राय ‌नहीं है ‌परन्तु ‌समाज में इसकी ‌आङ ‌में ‌शॆतान ‌भेङियों ‌ने ‌भी ‌‌अपनी ‌दुकानें ‌‌खोल कर ‌जनता ‌पर ‌सम्मोहनीय ‌जादू  ‌करके ‌वश ‌में कर ‌लिया। ‌पहले ‌आशाराम ‌अब ‌राम ‌रहिम ‌की ‌पोल ‌खुलते ‌ही ‌ ‌लोगो ‌को ‌इन ‌बाबाओं ‌से ‌भरोसा ‌उठने लगा। ‌इन ‌लोगो ‌ने ‌अपना ‌साम्राज्य ‌बिल्कुल ‌पॊराणिक ‌कथाओं ‌के ‌राजा ‌महाराजाओं ‌की ‌तरह ‌फॆला ‌रखा था। ‌इनको ना कोई डर था ना किसी कानून की परवाह। एसो आराम की जिन्दगी में इतने मशगूल हो ग‌ए ‌के कृष्ण भगवान को भी नही बक्शा । अपना ‌नाम ‌देकर ‌हर ‌वयक्ति को ‌काबू ‌कर ‌लेते है ‌इनमें इतना हूनर ‌होता है ‌के ‌इनके ‌परवचनों ‌तक ‌जाने ‌की ‌देरी है। जनता को...

जिन्दगी

राहगिर है ‌जिन्दगी हर रिश्ते में सफर करके सुख दुःख का अहसास लेकर अपनी राह चली जाती है जिन्दगी । कभी बचपन कभी बुढापे ‌से शान से गुजरती है ‌, ‌जवानी ‌ही है ‌‌जिसमे ‌कारनामे ‌करवा ‌जाती है जिन्दगी । ‌गुमानों ‌के ‌साये में ‌फस ‌कर ‌अभिमानी भी हो जाती है, किसी को भूखा ‌सुला देती ‌किसी की‌ ‌अमीरी से नींद ‌उङाती ये जिन्दगी । ‌उपर ‌वाले ‌ने ‌तो एक ‌धागे में ‌पिरोया ‌सबको फिर भी ‌उल्फत ‌में ‌फसती है, धर्म ‌के ‌नाम ‌पर ‌ब‌ंट कर भी ‌‌तेरा ‌मेरा ‌करके ‌निकल‌ जाती है ‌जिन्दगी। जन्म के समय उगती फसल जैसी खुशी हजार लाती , मरने पर अपने कहे जाने वालो पर एक रात भारी पङती ये छणभंगुर जिन्दगी Anita Gahlawat 

हिन्दी ‌शायरी

सुना था उसकी ‌सुंदरता ‌के ‌बारे ‌में      देखा ‌तो ‌वा‌क‌ई में ‌हद थी। सुना ‌था ‌बातो में नहीं ‌‌जीत ‌सकता ‌उसे कोई ‌ बातें हुई तो बोली ‌भी ‌कातिलाना थी। लोगों ने उसे घमंडी ‌बताया ‌पर ‌हर ‌कोई ‌नही ‌उसकी ‌दोस्ती ‌के ‌काबिल मिल जाती है रूह किसी से तो हटती नहीं दूनियां लग जाये तोङने तो टूटती नहीं क्योकि फरिश्तो का पहरा है इन्सानों का नहीं