बाबागर्दी
भारतीय संस्कृति अपने में महान है इसमें कोई दो राय नहीं है परन्तु समाज में इसकी आङ में शॆतान भेङियों ने भी अपनी
दुकानें खोल कर जनता पर सम्मोहनीय जादू करके वश में कर लिया। पहले आशाराम अब राम रहिम की पोल खुलते ही
लोगो को इन बाबाओं से भरोसा उठने लगा।
इन लोगो ने अपना साम्राज्य बिल्कुल पॊराणिक कथाओं के
राजा महाराजाओं की तरह फॆला रखा था। इनको ना कोई डर था ना किसी कानून की परवाह। एसो आराम की जिन्दगी में
इतने मशगूल हो गए के कृष्ण भगवान को भी नही बक्शा ।
अपना नाम देकर हर वयक्ति को काबू कर लेते है इनमें इतना हूनर होता है के इनके परवचनों तक जाने की देरी है। जनता
को अपनी बातों में फसाना इनको भली भाँति आता है।
दुकानें खोल कर जनता पर सम्मोहनीय जादू करके वश में कर लिया। पहले आशाराम अब राम रहिम की पोल खुलते ही
लोगो को इन बाबाओं से भरोसा उठने लगा।
इन लोगो ने अपना साम्राज्य बिल्कुल पॊराणिक कथाओं के
राजा महाराजाओं की तरह फॆला रखा था। इनको ना कोई डर था ना किसी कानून की परवाह। एसो आराम की जिन्दगी में
इतने मशगूल हो गए के कृष्ण भगवान को भी नही बक्शा ।
अपना नाम देकर हर वयक्ति को काबू कर लेते है इनमें इतना हूनर होता है के इनके परवचनों तक जाने की देरी है। जनता
को अपनी बातों में फसाना इनको भली भाँति आता है।
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