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Showing posts from June, 2017

Sad shayari

वायदा निभाने की कसमें खाकर प्यार  जता ‌कर मुँह मोङ ‌लिया। तेरे लिए ये ‌सॊदा सस्ता है पर मेरे ‌सीने को बेजान करके दिल करोड़ों ‌का ‌तोङ दिया ।। ** Read More तेरी जन्नत विरानो में ना बदले कभी रब ‌तुझे ‌रहमत ‌ब‌क्शे ‌यही ‌दुआ करेंगे। क्यु ‌आजमाती ह ‌हे ‌जिन्दगी  ‌‌इ‌तनी ‌तू ‌रहना पड़ेगा ‌रह ‌लेंगे ‌बिन ‌मिले जी ‌लेंगे।। ‌यादों से ‌जुदा न ‌करना कभी ‌वरना ‌कॆसे ‌ ‌तेरे ‌बिन ये जिन्दगी ‌जी ‌लेंगे।।। ** ‌सोगात ‌मिली है ‌दर्दो ‌की ‌ना भूल पायेंगे ‌सितम ‌करके ‌मेरे ‌दिल पर ‌क्या ‌तुम ‌सुख ‌से ‌रह ‌‌पाओगे। ‌तेरे ‌रस्ते ‌कदम ‌क्या ‌तेरी ‌गली ‌में ‌ही नहीं ‌आयेंगे ‌लेकिन ‌जब ‌उठेंगे ‌अतीत ‌के ‌प‌न्ने तो चाह कर ‌भी ‌भूला ‌ना ‌पाओगे।। ** ‌वक्त गुजरा था तेरे ‌जख्म-‌ए-सितम ‌से एक पा...

Welcome shayari

दिल से पलके बिछाई हम ने आपके आने की राह तकि सब ने आप ‌जॆसे ‌विरले ‌ही ‌मिलते हैं इस ‌जहां में, ‌जो ‌अपनी राह ‌खुद ‌बनाकर ‌विश्वास ‌रखते है ‌सबके साथ ‌चलने में ।। ** कब ‌से ‌बॆ‌ठे है ‌आश ‌लगाए‌ , ‌कब ‌से ‌था ‌इन्तजार ‌आपका। ‌‌आप ‌जॆसी ‌हस्ति ‌आई ‌हमारे बीच, दिल से ‌स्वागत है ‌मेहमान ‌‌आपका

Thoughts

सुख ‌ओर ‌दुख ‌‌‌आता ‌जरुर है ‌सुख में ‌सब ‌साथ है ‌ ‌दुख में ‌खा‌‌स को भी ‌गरुर है। ** ‌अपनो ‌का भी तभी ‌पता ‌चलता है ‌जब ‌जरुरत है। ‌वरना ‌कोन अपनो ‌को ‌आ‌जमाता है। ** ‌कोन‌ ‍कहता है ‌मां कभी नहीं ‌‌बदलती देखें है ‌हमने भी ऎसे ‌सितम एक हि ‌आंगन में ‌ए‌‌‌क ‌बे‌टे ‌से ‌मो‌हब्बत ‌दुसरे ‌से ‌दुध‌ ‌की ‌ ‌किमत ‌वसुलती।। ** सितारा होटल तो अमीरों के खेल हैं। भूखे तो अक्सर ढाबे पर ही जाया करते हैं। । ** ‌जिंदगी ‌की ‌दॊड में ‌दो ‌चीज ‌खास है। ‌एक ‌आश  ‌दूसरी ‌काश।।। ** कोबरा तो  ‌बदनाम है। ‌‌काटते तो दो ‌मुहॆं ‌सांप है।। ** चमचागरि ‌ओर ‌चापलुसी ‌अक्सर ‌तारिफ ‌करके ‌बङे  ‌से ‌ब‌ङे ‌वयक्ति ‌को ‌कान ‌का ‌कच्चा ‌ब‌ना ‌देती हैं। Read more ** अच्छा हो या बुरा वक्त गुजर जाता है कुछ पल यादगार होते...

Loving shayari

कठखानी - सी देह सुहानी -सी भीगे बदन में लहर तूफानी-सी जुल्फे तेरी उलझी उलझी - सी निगाहें तेरी सुलझी सुलझी- सी आँखे मिलाकर फेर लेती हो,  करती हो दिल पर मनमानी- सी ** मयखानो से ज्यादा नशीली शराब हो तुम मेरे फसानो की हकीकत ओर ख्वाब हो तुम। मेरे से रुसवा हुआ ह ये जमाना इस जमाने के हर प्रशन का जवाब हो तुम ।। ** तेरे बिना ना सोचा ना सोचेगे कभी कोई सपना आप दूर से भी गुजरते हो तो, हवा बता देती है वो जा रहा तेरा अपना ** एक खटक थी तुमको पाना तुम से दिल लगाना अब हो गये हो मेरे इस कदर कि एक जन्म तो क्या किसी भी जन्म दूर मत जाना।।

Motivated sayari

अल्फाजों में दम है तो कलम जरूर चलेगी होसलो में ‌‌ताकत ह तो ‌‌कश्ति नहीं ‌डुबेगी। हुनर तो हर  किसी में है कोई ना कोई किसी ने ‌किस्मत पर ‌छोङा  अपने को। किसी ने ‌‌हिम्मत से ‌जोङा    ‌सपने को।। ** समय ना कभी किसी के लिये ‌ठहरा है ना ठहरेगा। ‌जिसने ‌जोङा ‌तिनका ‌तिनका ‌सुख मेहनत से वो  ‌मुसीबतो से ना ‌घबरायेगा ना ‌टुटेगा ना ‌ठहरेगा।। ** अगर अपने पर भरोसा है तो कुछ भी चाहते हो वो ‌कदमों में होगा । मत होने दे कमजोर अपने को इस दुनिया में तुम्हारा भी कोई वजूद है। कई लम्हे आते हैं जिंदगी में अच्छे बुरे, मत घबरा अपने को कर इतना बुलंद के हर पहलु तेरा होगा ।।।

Funny shayari

रफ़्तार से चल रही ह जिन्दगी पर हालत सामान्य ट्रेन के डब्बे जैसी है। दिल का वजन लफ्जों में न बयां होगा धर्म संकट मे हूँ किसी को नही छोड़ सकता धारू पी लू तो बीवी मुँह सुंघती है ना पीउं तो दोस्ती ऊब जाती है। ।। ** गधो के सामने इज्जत से पेश मत आना ये कुरङी पर ही रंजते है। जो इनको बख्शता ह सलाम नमस्ते ये उनको नालायक गधा ही समझते हैं ।। ** प्यार दीवाना होता है या मस्ताना होता है, ये वहीं बताएंगे जो काॅलेज में मजनू थे। नौकरी के लिए अब पापड़ बेल रहे हैं, दर दर की ठोकरे खा रहे हैं जो जुगनू थे। । ** घर में बीवी आफिस में बोस बस रास्ता हि है जिसमें मन मर्जी कर लेते हैं । दो- चार कमीने मिलते ह कभी कभी वो ही दोस्ती वाले नगमे मस्ती से गा लेते हैं। ** दोस्तों से मुलाकात होगी आज ममी पापा दोनों को ही कमीने पसंद नहीं है। किसी को पियक्कङ बोलते हैं किसी को आवारा, कोन समझाये मम्मी पापा को पढ़ाई में ही अव्वल आना कोई महानता नहीं है।। लङकियों से दोस्ती कभी सोची ही नहीं थी, ना कभी पढ़ने में आँखे घिसाई ऎसे अच्छे इन्सान कहा मिलेंगे आज ** एक बार कोई बेवङा बन के सुधर जाता है लेकिन लोग नहीं सुधरते। कहे...

बरसाती दिन

"बारिश, बचपन और बदलते मौसमों पर एक भावनात्मक कविता" यह कविता सिर्फ बारिश की बूंदों की बात नहीं करती, यह उन भीगे लम्हों की याद दिलाती है जब मिट्टी की सोंधी खुशबू में बचपन सांस लिया करता था। टहनियों की सरसराहट, मिट्टी के घर, दादी की कहानियाँ और गली के शोर — सब मिलकर एक ऐसा संसार रचते हैं, जहाँ अब हम लौट तो नहीं सकते, पर यादें अब भी उसी दरवाज़े पर खड़ी हैं। यह कविता मौसम की तरह बदलते जीवन को समझने और पुराने पलों को संजोने का एक भावुक दस्तावेज़ है। धरती से आती बूंदो की सुगन्ध ओर पेड़ो की हिलती टहनियाँ कुछ कहने को,  बयान करने को  मजबूर कर जाती हैं । ** इन बारिशो में कॆसा जादू है, सूरज भी नहीं दिखाई देता ओर सबकुछ सुखा देती हैं ** वो बारिश में नहाना, रुकने के बाद मिट्टी के घर बनाना इकट्ठे होकर मोहल्ले में जोर-जोर से शोर मचाना कूद-कूदकर धरती पर पक्षियों के लिये पानी मांगना बारिश में नहाना ओर बड़ो का डाटना कहीं नहीं दिखाई देता अब वो बचपन सुहाना ** बदलते मौसम में क्या जादू है कुछ कह नहीं सकते । जीवन का भी यही आधार है, कभी धूप कभी छांव एक जैसे मौसम में रह ...