Loving shayari

कठखानी - सी देह सुहानी -सी
भीगे बदन में लहर तूफानी-सी
जुल्फे तेरी उलझी उलझी - सी
निगाहें तेरी सुलझी सुलझी- सी
आँखे मिलाकर फेर लेती हो,
 करती हो दिल पर मनमानी- सी

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मयखानो से ज्यादा नशीली शराब हो तुम
मेरे फसानो की हकीकत ओर ख्वाब हो तुम।
मेरे से रुसवा हुआ ह ये जमाना
इस जमाने के हर प्रशन का जवाब हो तुम ।।

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तेरे बिना ना सोचा
ना सोचेगे कभी कोई सपना
आप दूर से भी गुजरते हो तो,
हवा बता देती है वो जा रहा
तेरा अपना

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एक खटक थी तुमको पाना तुम से दिल लगाना
अब हो गये हो मेरे इस कदर कि
एक जन्म तो क्या किसी भी जन्म दूर मत जाना।।







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