Sad shayari
वायदा निभाने की कसमें खाकर
प्यार जता कर मुँह मोङ लिया।
तेरे लिए ये सॊदा सस्ता है
पर मेरे सीने को बेजान करके
दिल करोड़ों का तोङ दिया ।।
**
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तेरी जन्नत विरानो में ना बदले कभी
रब तुझे रहमत बक्शे यही दुआ करेंगे।
क्यु आजमाती ह हे जिन्दगी इतनी तू
रहना पड़ेगा रह लेंगे बिन मिले जी लेंगे।।
यादों से जुदा न करना कभी वरना
कॆसे तेरे बिन ये जिन्दगी जी लेंगे।।।
**
सोगात मिली है दर्दो की ना भूल पायेंगे
सितम करके मेरे दिल पर
क्या तुम सुख से रह पाओगे।
तेरे रस्ते कदम क्या तेरी गली में ही नहीं आयेंगे
लेकिन जब उठेंगे अतीत के पन्ने
तो चाह कर भी भूला ना पाओगे।।
**
वक्त गुजरा था तेरे जख्म-ए-सितम से
एक पागलपन था तुझे चाहने में ।
अब पता चला बहुत प्यारा हमसफर
बनाया ह मेरे लिए रब ने ।
यू ही वक्त जाया किया ऊपर वाले से
तुझे मांगनें में ।।।
**
कतरा-कतरा टूटे दिल का लहू बहा था
अश्कों ने सिजदा किया था तेरे दर पर ।
बरसो बाद देखा तुझे फटेहाल तो
तरस आया तेरे मुक्कदर पर।।
**
अश्को से पानी नही लहू बहा है
तुने दिल तोङा है तुझे सकुन नही
मिलने वाला।
कभी आयेगा वक्त मेरा भी तब
पूछेंगे के क्या है वक्त का तगाजा !
तु घमंड से जमीं पर कॆसे ?,लिखने
वाले ने तुझे बरबाद कॆसे
लिख डाला? ।।
**
पता नहीं क्यो लोग बे मतलब खफा
हो जाते हैं
बात कुछ नही होती है बस मुहं फूला
के बैठ जाते हैं
**
प्यार जता कर मुँह मोङ लिया।
तेरे लिए ये सॊदा सस्ता है
पर मेरे सीने को बेजान करके
दिल करोड़ों का तोङ दिया ।।
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तेरी जन्नत विरानो में ना बदले कभी
रब तुझे रहमत बक्शे यही दुआ करेंगे।
क्यु आजमाती ह हे जिन्दगी इतनी तू
रहना पड़ेगा रह लेंगे बिन मिले जी लेंगे।।
यादों से जुदा न करना कभी वरना
कॆसे तेरे बिन ये जिन्दगी जी लेंगे।।।
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सोगात मिली है दर्दो की ना भूल पायेंगे
सितम करके मेरे दिल पर
क्या तुम सुख से रह पाओगे।
तेरे रस्ते कदम क्या तेरी गली में ही नहीं आयेंगे
लेकिन जब उठेंगे अतीत के पन्ने
तो चाह कर भी भूला ना पाओगे।।
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वक्त गुजरा था तेरे जख्म-ए-सितम से
एक पागलपन था तुझे चाहने में ।
अब पता चला बहुत प्यारा हमसफर
बनाया ह मेरे लिए रब ने ।
यू ही वक्त जाया किया ऊपर वाले से
तुझे मांगनें में ।।।
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कतरा-कतरा टूटे दिल का लहू बहा था
अश्कों ने सिजदा किया था तेरे दर पर ।
बरसो बाद देखा तुझे फटेहाल तो
तरस आया तेरे मुक्कदर पर।।
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अश्को से पानी नही लहू बहा है
तुने दिल तोङा है तुझे सकुन नही
मिलने वाला।
कभी आयेगा वक्त मेरा भी तब
पूछेंगे के क्या है वक्त का तगाजा !
तु घमंड से जमीं पर कॆसे ?,लिखने
वाले ने तुझे बरबाद कॆसे
लिख डाला? ।।
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पता नहीं क्यो लोग बे मतलब खफा
हो जाते हैं
बात कुछ नही होती है बस मुहं फूला
के बैठ जाते हैं
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अगर आपको मेरा लिखा हुआ अच्छा लगे या कोई सुझाव देना हो तो कृपा आप कमेंट करें । धऩ्यवाद ।