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Showing posts from February, 2018

मुकाम

तल्ख न थी किसी को जब जिन्दगी में कोई मुकाम न था जब हासिल हुआ थोङा-सा जहां वहां अपनों का नाम न था दुनियां को पहले आलोचना फिर तारिफ के सिवा काम न था जहां सकुन मिला वही ठहर गये चलते रहने से आराम न था                                *  *  *  * इन परिदों को क्या पता शिकारी भी होते हैं जब जाल में फंस जाते हैं तभी अनुभव पाते हैं।।

Real thought

बोलने वाले तो शक के दायरे में आ जाते हैं किन्तु खतरा तो उनसे होता है जो शरीफ दिखते हैं।।            *  *  *  * जो जमानें से पढने को मिलता है अकसर वो किताबों में नही मिलता।

realty attitude shayari

औरतौं की बातें औरतौ तक ही रहने दो जनाब कभी चुङियों का वास्ता मिल गया तो बहुत तकलीफ होगी। कभी किसी को नीचा मत दिखाओ कभी किसी को छोटा मत समझो वर्ना बङपन के चक्कर में अकेले रह जाओगे दरवाजा बन्द ओर अपनों को भी नहीं पाओगे। कैसे रह लेते तेरे बिन हम चाहो करलो कोई  सितम

चापलूसी चम्मचागिरी

चापलूसी पङती चम्मचागिरी पर भारी चम्मचागिरी सोचे चापलूसी है एक गिङगिङाती बिमारी । दौनों में एक दिन बहस हो गई👇 चम्मचागिरी:- हे भृष्ट चापलूसी! सुनो पैसे मिल जाऐ तुझे जहां वही बे हिचक अपना जमीर बेच देती हो। खुद की असफलता का ठीकरा किसी ईमानदार के सिर फोङती हो। ऐसे गिङगिङाती हो मतलब में गधे को भी बाप बना लेती हो।। नमस्ते को भी नहीं बक्शती वो भी कई प्रकार की बोलती हो।। काम आने जाने से मतलब नहीं, बस जी हां जी हां की प्रैक्टीश रखती हो।। झूठ बोल बोल कर अपने सीनियरों पर सममोहनीय जादू  बिखेरती हो।। चापलूसी भी अपने आप में कौन-सी कम थी , वो तो पहले से हि चम्मचागिरी पर बुलदं थी । बोली :-कान खोल कर सुन ले प्यारी तू ह 100 बिमारियों की एक बिमारी। जहां पर पकड़ दिखे वही पर तेरी यारी चुगली मार मार कर भगा दी तुने ईमानदारी।। कोई डिपारंटमेंट हो या राजनीति ,तू बेहूदेपन  से करती दूनियांदारी तेरे हाथों में हल्दी की गांठ  आ जाये  बन बैठती हो पूरी पंसारी तू तो पहले से ही बिकाउं है मेरे पर क्या पङेगी भारी  चम्मचागिरी हो या चापलूसी  हम दोनों बला हैं, किन्...