चापलूसी चम्मचागिरी

चापलूसी पङती चम्मचागिरी पर भारी
चम्मचागिरी सोचे चापलूसी है एक गिङगिङाती बिमारी ।

दौनों में एक दिन बहस हो गई👇


चम्मचागिरी:- हे भृष्ट चापलूसी! सुनो
पैसे मिल जाऐ तुझे जहां वही बे हिचक अपना जमीर बेच देती हो।
खुद की असफलता का ठीकरा किसी ईमानदार के सिर फोङती हो।
ऐसे गिङगिङाती हो मतलब में गधे को भी बाप बना लेती हो।।
नमस्ते को भी नहीं बक्शती वो भी कई प्रकार की बोलती हो।।
काम आने जाने से मतलब नहीं, बस जी हां जी हां की प्रैक्टीश रखती हो।।
झूठ बोल बोल कर अपने सीनियरों पर सममोहनीय जादू 
बिखेरती हो।।

चापलूसी भी अपने आप में कौन-सी कम थी ,
वो तो पहले से हि चम्मचागिरी पर बुलदं थी ।
बोली :-कान खोल कर सुन ले प्यारी
तू ह 100 बिमारियों की एक बिमारी।
जहां पर पकड़ दिखे वही पर तेरी यारी
चुगली मार मार कर भगा दी तुने ईमानदारी।।
कोई डिपारंटमेंट हो या राजनीति ,तू बेहूदेपन 
से करती दूनियांदारी
तेरे हाथों में हल्दी की गांठ  आ जाये 
बन बैठती हो पूरी पंसारी
तू तो पहले से ही बिकाउं है
मेरे पर क्या पङेगी भारी 


चम्मचागिरी हो या चापलूसी 
हम दोनों बला हैं,
किन्तु गजब की कला हैं।
किसी को आती नहीं,
किसी की कभी जाती नहीं।।।।















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