Justice for Manisha -मनीषा की पुकार
"हर रोज़ अख़बार की सुर्ख़ियाँ हमें झकझोर देती हैं—
कहीं बेटी को कोख में मार दिया गया,
कहीं सड़क पर घसीटा गया,
कहीं खेतों में लहूलुहान फेंक दिया गया।
ये कैसा समाज है जहाँ बेटियाँ देवी भी हैं और शिकार भी?"
"मनीषा की पुकार"
खेतों की मिट्टी आज रोई,
लहू से भीगी धानी डोली।
कलियाँ जिसको सपनों में गातीं,
आज वही चुपचाप खो गईं।
दरिंदों ने रौंदा चमन का आलाप,
काट दी गर्दन, बुझा दी हर साँस।
पर क्या समझे थे वो हैवान,
कि औरत का खून यूँ बहा देंगे?
नहीं!
हर बूंद बनेगी अंगार,
हर चीख बनेगी हुंकार।
मनीषा अकेली नहीं है—
उसके साथ खड़ी हैं लाखों मनीषाएँ,
जो न झुकेंगी, न डरेंगी,
अपने लहू से इंक़लाब लिखेंगी।
माँ की गोदी से उठी चिता की लौ,
अब क्रांति का मशाल बनेगी।
मनीषा की चुप्पी नहीं—
उसकी आवाज़ हम सबकी जुबान बनेगी।
"अब बेटियाँ चुप नहीं रहेंगी।
उनकी आँखों का पानी अब आग बनेगा,
उनके आँसुओं से न्याय की बाढ़ उठेगी।
-Anita Gahlawat
याद रखो—
बेटियों के साथ अन्याय का हर क़दम
समाज की कब्र खुद खुदाई करता है।
अब बेटियाँ अपनी कलम, अपनी आवाज़ और
अपने साहस से, नई इबारत लिखेंगी।"
-Anita Gahlawat
आप इस पर अपने कमेंट और सुझाव नीचे कमेंट
बॉक्स में जरूर लिखना ।
Bilkul ji. Manisha k Sath jo ghinoni vardat hui h kal meri aapki ya kisi ki bhi bahan beti k sath aisi vardat na ho isliye kthor se kathor saja milni chahiye apradhiyon ko.justice for Manisha.🙏👍
ReplyDeleteNice
ReplyDelete