हरियाणस्तुतिः

 हरियाणायाः गीतम्-1



श्लोक १:


हरितभूमिर्मम जननी या या वीरभूमिः हरियाणानाम्।

मयूरिण्याः गिरिमुखेभ्यः तु डबचिक्‌तटाद्यन्तकं यावत्।

सर्वत्र शान्तिर्विलसति, स्वधर्मे नित्यं स्थिताः प्रजाः॥


हिंदी भावार्थ:

यह हरी-भरी भूमि मेरी जननी है, यह वीरों की भूमि हरियाणा है।

मोरनी के पहाड़ों से लेकर डबचिक के तट तक, हर दिशा में शांति व्याप्त है।

यहाँ की जनता अपने कर्तव्यों में नित्य स्थिर और सजग रहती है।



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श्लोक २:


कृषकाः कर्मयोगिनः, रक्षका जयशीलकाः।

सैनिकाः च ददत्येव राष्ट्राय स्वजीवनम्॥


हिंदी भावार्थ:

यहाँ के किसान कर्मयोगी हैं, और रक्षक (सुरक्षाबल) सदैव विजय के लिए तत्पर रहते हैं।

सैनिक राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना जीवन तक समर्पित कर देते हैं।



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श्लोक ३:


कृष्णमृगः शशकः, कालतीतरः च संरक्षिताः।

सुरजकुण्डं च शोभते यथा हृदयस्य गौरवम्॥


हिंदी भावार्थ:

यहाँ कृष्णमृग (काला हिरन), खरगोश, और काला तीतर जैसे जीव सुरक्षित हैं।

सुरजकुंड इस राज्य की शोभा और गर्व का प्रतीक है।



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श्लोक ४:


द्रोणगुरुः यत्र साक्षात्, अभिमन्युश्च बाला वीरः।

कल्पना समा कन्या, साहसे समता धारयति॥


हिंदी भावार्थ:

यह वही धरती है जहाँ द्रोणाचार्य जैसे गुरु और अभिमन्यु जैसे बालवीर जन्मे।

यहाँ की बेटियाँ भी कल्पना चावला जैसी साहसी और निडर होती हैं।



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श्लोक ५:


कुश्ती-कबड्डी-खेलषु, शौर्यं स्फुरति नगरे नगरे।

मेलेषु गीतनृत्यैः, विलसति हरियाणारसः॥


हिंदी भावार्थ:

हर गाँव और शहर में कुश्ती और कबड्डी जैसे खेलों में शौर्य झलकता है।

और मेलों में गीत और नृत्य के माध्यम से हरियाणा की मस्ती और संस्कृति झलकती है।



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श्लोक ६:


साधुजीवनं लोकानां, सरलता तत्र हि भूषणा।

परिश्रमस्य वैशिष्ट्यं, तत्रैव निहितं महान्॥


हिंदी भावार्थ:

यहाँ के लोगों का जीवन सादा और सहज है, और उनकी सरलता ही उनकी शोभा है।

परिश्रम करना यहाँ के लोगों की सबसे बड़ी विशेषता है।



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श्लोक ७:


सर्वे जनाः संगतयाः, प्रेम्णा वसन्ति नित्यशः।

यथैव संदेशो लोके, "एकता, शान्तिः, परिश्रमः"॥


हिंदी भावार्थ:

यहाँ के सभी लोग मिल-जुलकर प्रेमपूर्वक रहते हैं।

यही संदेश है इस भूमि का: “एकता, शांति और परिश्रम।”





जयतु भारतमातरम्। जयतु हरियाणादेशः॥

हिंदी भावार्थ:

भारत माता की जय हो! हरियाणा प्रदेश की जय हो!




हरियाणायाः गीतम्-2


यह रहा "हरियाणायाः स्तुतिः" संस्कृत काव्य का छंदबद्ध रूप, प्रत्येक श्लोक अनुष्टुप छंद (8+8+8+8 वर्ण) में लिखा गया है — जो सबसे सामान्य और पारंपरिक छंद है (जैसे श्रीमद्भगवद्गीता में होता है)। हर श्लोक के नीचे उसका सरल हिन्दी अर्थ भी दिया गया है।



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श्लोक १


हरियाणादेशे जननी शुभा या,

कृषिवृत्तिपरा सदा सम्पदा या।

वीरप्रसूता च सदा सुकीर्ति,

नमस्तस्मै भूधराय शुभाय॥


हिन्दी अर्थ:

हरियाणा वह पवित्र भूमि है जो कृषिप्रधान है, सदैव समृद्ध और गुणों से भरी हुई है। यह वीरों को जन्म देने वाली भूमि है, जिसकी कीर्ति दूर-दूर तक फैली है। उस पुण्यभूमि को मैं नमन करता हूँ।



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श्लोक २


सरस्वत्याः तटे रम्ये,

यत्र कृषकः सदा यते।

हलध्वनिः गर्जति स्थिरे,

धन्यं कर्म तथैव ते॥


हिन्दी अर्थ:

सरस्वती नदी के रमणीय तट पर जहाँ किसान परिश्रम करता है, वहाँ हल की आवाज़ गूंजती है। यह कर्म और श्रम की महान भूमि है – वास्तव में धन्य है यहाँ का जीवन।



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श्लोक ३


वीरांगनानां यत्र कथा,

शौर्यं यत्र प्रदर्श्यते।

भूमिः पुरातना सैव,

संस्कृतेः मूलरूपिणी॥


हिन्दी अर्थ:

यह वह भूमि है जहाँ वीरांगनाओं की गाथाएँ गायी जाती हैं, जहाँ शौर्य और साहस की परंपरा है। यह प्राचीन भूमि भारतीय संस्कृति की जड़ है।



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श्लोक ४


नाट्यं गीतं च ललितं,

जनानां हर्षकारकं।

यत्र स्त्रियः समुज्ज्वलाः,

शोभते सा सदा मही॥


हिन्दी अर्थ:

यहाँ का लोकनृत्य और लोकगीत हर्ष उत्पन्न करते हैं। यहाँ की महिलाएँ तेजस्विनी और सशक्त हैं — उनकी गरिमा से यह भूमि सदैव शोभायमान रहती है।



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श्लोक ५ (समापन)


जयतु हरियाणादेशः,

वर्धतां सदा सौख्यतः।

संस्कृतेः ध्वजवाहकः,

शिरसि भारतस्य च॥


हिन्दी अर्थ:

हरियाणा राज्य विजयी हो! यह सदैव सुख और समृद्धि में बढ़ता रहे। यह राज्य भारतीय संस्कृति का ध्वजवाहक है, और भारतमाता के मस्तक का तिलक है।



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