"जहाँ भावनाएँ सीमा लांघती हैं, वहीं से शुरू होता है मेरा लेखन संसार"।
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निगाहों में नूर हैं
इसमें मेरा क्या कसूर है
खुली किताब है दिल मेरा
इसमें बेहिसाब शुरूर है,
ये पढकर आपके दिल ने
खुद से कहां कुछ जरूर है,
बेगाने नहीं है अल्फाज मेरे
कुछ तो क्षमता थी लिखने की
कुछ आपका असर जरूर है......
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