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"Anita Gahlawat की नवीनतम शायरी में भावनाओं का प्रवाह पानी की धार जैसा है—रोकने पर भी प्रतिभा और जज़्बा अपना रास्ता खुद चुन लेते हैं।"
"प्रतिभा भी पानी की धार जैसी है—
कोई न कोई रास्ता चुन ही लेती है,
चाहे कितने भी रोकने वाले खड़े हों।"
— Anita Gahlawat
"जो बात दिल पे लग जाती है,
वो 'ठन' जाती है…
और वहीं से शुरू होता है
सच्चे संघर्षों का दौर।"
— Anita Gahlawat
"जो बात दिल पे लग जाती है, वो 'ठन' जाती है,
और वहीं से शुरू होता है सच्चे संघर्षों का दौर।"
— Anita Gahlawat
जहां गिरी शबनम वही आग-सी लगती रही
आंखो से सारी रात बारीश बही
ओर खुद कायनात बेखबर रही.....
आंखो से सारी रात बारीश बही
ओर खुद कायनात बेखबर रही.....
जो दूसरों को गिराने का शौक रखते हैं
यकीनन गिरने का वक्त उनका भी आता है ।।
हैसियत बहुत है हकीकत की
परिंदे झूठी उड़ान के सहारे नहीं होते ।।
दिखावे ने
सस्ती चीजों से गठबंधन किया होगा !!
तब से महंगे शौक आसमानों में हैं।।
रास्ते तो बहुत मिलें!!
धूप हो या छांव हमने केवल वही चुना जिसमें सुकून था ।।
करवट बदली जिंदगी ने तो लोग बदल गए....
दिन बुरे थे तो कोई नहीं था दिन अच्छे हैं तो भीड़ क्यों हैं।।
जुबान तो सभी के पास है पर सच्चाई बेजुबान है,
पारिवारिक पृष्ठभूमि बताती है कोई मीठा कोई कड़वा क्यों है ।
जमाने में हमदर्द बहुत हैं
पर दुखी के साथ दुखी
और सुखी के साथ सुखी बहुत कम हैं ।।
अन्दरूनी रंजिशों से अच्छा है
खुलमखुल सरेआम हो जाये
दबी रंजिशे ज्यादा खतरनाक है
*****
1000 understanding में
खुलमखुल सरेआम हो जाये
दबी रंजिशे ज्यादा खतरनाक है
*****
1000 understanding में
एक Mis-understanding
दूरी बढाने के लिए काफि है
Hindi Kavita :- अनकहा प्यार
*****
जिन्दगी में कुछ खामोशियां भी जरूरी हैं
लोगों का मुवायना करने के लिए
*****
अनजान बनकर चलना भी मासुमियत की
गवाही देता है
*****
अच्छा लगता है जब कोई कहता है
Hindi Kavita :- अनकहा प्यार
*****
जिन्दगी में कुछ खामोशियां भी जरूरी हैं
लोगों का मुवायना करने के लिए
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अनजान बनकर चलना भी मासुमियत की
गवाही देता है
*****
अच्छा लगता है जब कोई कहता है
रूको हम भी तेरे साथ चलते हैं।।
ख्वाब ही हैं जो कारवा ढुंढते है
पेट तो भूख मिटा के सो जाता है.....
***
राहें तो मुसाफिर बनाते हैं
अपनो की खुशी ढुंढते ढुंढते.....
***
सफल वह है जिसने दिल जीते है
शिकार तो बिल्ली भी कर लेती है....
***
नये कारवां मिल गये चलने के लिये
पर हर कारवां पुराने जैसा नहीं होता.....
***
सफर चाहे रास्ते का हो या जिंदगी का
उतार चढाव जरूर आता है.....
***
मतलब निकलते ही अहसान भूल जाते हैं
अकसर ऐसे लोग ज्यादा मार खाते हैं...
***
प्रेम ओर नफरत एक ही जगह पनपती है
वो आप पर निर्भर है कौनसा चुनतें हैं.....
***
सलाह मशविरा देने वाले बहुत हैं
लेकिन खुद पर आजमाने में आलस करते हैं
***
सोच कर देखो जो संभलकर चलते है
उन्होनें कितनी ठोकरे खाइ होगीं....
***
दूसरे को आजमानें से पहले अपने अन्दर
झांक कर देखना चाहिये....
***
लफ्जों में भी गर्मी-सर्दी जैसा मौसम होता है
प्यार से बोलो तो ठण्ड महसुस होती है ।
पेट तो भूख मिटा के सो जाता है.....
***
राहें तो मुसाफिर बनाते हैं
अपनो की खुशी ढुंढते ढुंढते.....
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सफल वह है जिसने दिल जीते है
शिकार तो बिल्ली भी कर लेती है....
***
नये कारवां मिल गये चलने के लिये
पर हर कारवां पुराने जैसा नहीं होता.....
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सफर चाहे रास्ते का हो या जिंदगी का
उतार चढाव जरूर आता है.....
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मतलब निकलते ही अहसान भूल जाते हैं
अकसर ऐसे लोग ज्यादा मार खाते हैं...
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प्रेम ओर नफरत एक ही जगह पनपती है
वो आप पर निर्भर है कौनसा चुनतें हैं.....
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सलाह मशविरा देने वाले बहुत हैं
लेकिन खुद पर आजमाने में आलस करते हैं
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सोच कर देखो जो संभलकर चलते है
उन्होनें कितनी ठोकरे खाइ होगीं....
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दूसरे को आजमानें से पहले अपने अन्दर
झांक कर देखना चाहिये....
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लफ्जों में भी गर्मी-सर्दी जैसा मौसम होता है
प्यार से बोलो तो ठण्ड महसुस होती है ।
मुङकर क्या देखना जब चल ही दिये
उन मंजरो से भी निपटना है जो रास्ते में मिलेंगे
* * * *
सोच लेते है हर खीश दिल की हसरत से
चाहत के आईने से वाकिफ नहीं हो तुम
* * * *
अजीब दास्तां है इन हसरतों की
अजनबी हाल पूछ रहें है ओर
अपनों को खबर भी नहीं......
अजनबी हाल पूछ रहें है ओर
अपनों को खबर भी नहीं......
* * * *
Anita Gahlawat
Mst
ReplyDeleteThanks
ReplyDeleteआपके ब्लॉग अब नहीं आ रहे बहुत दिनों से आप बहुत अच्छा लिखती हैं
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