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Showing posts from January, 2019

गणतंत्र दिवस

दोस्तो देश भक्ती एक दिन की नहीं होती उन शहिदों के परिवारों को सदा सम्मान देना जिन्होनें देश के लिए आन-बान-शान नहीं झुकनें दी.... गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाई....... **** हमारे पूरखों का लहू सना था तब जाकर हमनें आजादी पाई थी कैसे भूल जाये हम अपनों को जिन्होनें देश के लिए फांसी खाई थी आई थी एकता की लहर भारत में तब जाकर 15 अगस्त ओर 26 जन. जैसी तारीख पाई थी.....

motivation 2 lines

जो तूफानों में भी खुद को संभालनें का हूनर सिख लेते हैं क्या मजाल उनको कोई गिरा दे.... *** शान्ति ओर संयम से रहना चाहते है वो फालतू  सवाल- जवाब में वक्त जाया नही करते.... *** हारना अपनो से सिख लेता है वो कभी अकेला नही होता.... *** ये मत समझ लेना उम्र भर कोई साथ देगा लोग तो जनाजे में भी कंधे बदल कर चलतें हैं। ***

मेरी पहचान

सूरत से क्या लेना—मेरे शब्दों में मेरा अक्स दिखता है। जब भी करनी हो मुझसे पहचान, मेरी वैचारिकता ही काफ़ी है। अंदरूनी नहीं होती कोई बात, फिर बात छिपाने की क्या ज़रूरत? जो भी हूँ, कायदे से हूँ— ये दुनिया खुद कहती है। तस्वीर लगाने को कहते हैं लोग, पर मैं कहती हूँ— तस्वीर से कहाँ मुआयना होता है शख़्सियत का! उसमें तो हर इंसान संवरा नज़र आता है, रौशनी और रंग बस बाहर का चेहरा दिखाते हैं। देखना है तो हर शब्द की तर्ज़ना देखो, हर पंक्ति में बसते मेरे एहसासों को पढ़ो। जहाँ हँसी की खनक भी है, और आंसू की नमी भी। मेरी हर तहरीर में मेरा अक्स नज़र आता है— कभी सपनों की उड़ान में, कभी सच के आईने में, कभी संघर्ष की आग में, तो कभी अपनापन ओढ़े चुपचाप बैठा। मैं वही हूँ— जिसकी पहचान तस्वीर से नहीं, शब्दों की रूह से होती है।  सुरत से क्या लेना मेरे शब्दों में मेरा अक्श दिखता है। जब भी करनी हो मुझसे पहचान,वैचारिकता ही काफि है अंदरूनी नहीं होती कौई बात  फिर बात क्या होती जो भी हूं कायदे से हूं , कहती है ये दूनियां खुद की तस्वीर लगाओ ? उनको बता दूं कुछ.... तस्वीर से कहां मुवायना होता है शख्शियत...

आरक्षण

इस आरक्षण का डंक बहुत जहरीला है दोस्तों जनरल जाति जनरल रेल के डिब्बे जैसी कर दी है ना कोई आधार कार्ड ना कोई और आइडी की जरूरत बस टिकट पकङो किसी भी ट्रेन में चढ जाओ ,जगह फिर भी नहीं मिलने वाली...