real thoughts

ख्वाब ही हैं जो कारवा ढुंढते है
पेट तो भूख मिटा के सो जाता है.....


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राहें तो मुसाफिर बनाते हैं
अपनो की खुशी ढुंढते ढुंढते.....


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सफल वह है जिसने दिल जीते है
शिकार तो बिल्ली भी कर लेती है....


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नये कारवां मिल गये चलने के लिये
पर हर कारवां पुराने जैसा नहीं होता.....


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सफर चाहे रास्ते का हो या जिंदगी का
उतार चढाव जरूर आता है.....


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मतलब निकलते ही अहसान भूल जाते हैं
अकसर एेसे लोग ज्यादा मार खाते हैं...


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प्रेम ओर नफरत एक ही जगह पनपती है
वो आप पर निर्भर है कौनसा चुनतें हैं.....


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सलाह मशविरा देने वाले बहुत हैं
लेकिन खुद पर आजमाने में आलस करते हैं


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सोच कर देखो जो संभलकर चलते है
उन्होनें कितनी ठोकरे खाइ होगीं....


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दूसरे को आजमानें से पहले अपने अन्दर
झांक कर देखना चाहिये....

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लफ्जों में भी गर्मी-सर्दी जैसा मौसम होता है
प्यार से बोलो तो ठण्ड महसुस होती है ।








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