मां

 माँ की दुआएं

✍️ लेखिका: Anita Gahlawat

जिसने थामे रखा हर तूफ़ान में मुझे,
वो ममता की छाँव — माँ लगती है।
ना सोई खुद, मगर मेरी नींद बचाई,
हर लोरी में उसकी दुआ लगती है।

भूखी थी मैं, तो खुद ने खाया नहीं,
हर निवाले में उसकी सदा लगती है।
जब भी डगमगायी मैं राहों में कहीं,
उसकी आहट ही मेरी दिशा लगती है।

दूर हूँ अब, मगर दिल के पास है,
हर धड़कन में वो ही हवा लगती है।
दुनिया कहे या ना कहे कुछ भी,
माँ की मोहब्बत ही खुदा लगती है।









सो जाते है जब अपनें गहरी नींद में...
प्यार का सागर ही सूख जाता है....

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