chaild level
जितने भी बङे नाम मशहूर हुये है ज्यातर बचपन में नटखटऔर नालायक कहे जाते थे क्योकी वे बङो की समझ के अनुसार नहीं अपनी समझ के मालिक थे। महान दार्शनिक रूसो के अनुसार बच्चे के अन्दर समय ओर तजुर्बे के साथ अपने आप समझ आती है वो समझ ठोस ओर स्थाई है । उदाहरण के लिये अगर एक छोटा बच्चा बार बार जलती आग को देखकर उससे खेलने के लिये छटपटा रहा है लेकिन आग की गरमाहट का उसे तभी अहसास होगा जब वह खुद आग की आंच महसुस करेगा। बहुत से मां बाप है जो अपने Level के अनुसार बच्चे का व्यवहार चाहते है जो बच्चे के future के लिये नुकसानदायक है।