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Showing posts from June, 2018

chaild level

जितने भी बङे नाम मशहूर हुये है ज्यातर बचपन में नटखटऔर नालायक कहे जाते थे क्योकी वे बङो की समझ के अनुसार नहीं अपनी समझ के मालिक थे। महान दार्शनिक रूसो के अनुसार बच्चे के अन्दर समय ओर तजुर्बे के साथ अपने आप समझ आती है वो समझ ठोस ओर स्थाई है । उदाहरण के लिये अगर एक छोटा बच्चा बार बार जलती आग को देखकर उससे खेलने के लिये छटपटा रहा है लेकिन आग की गरमाहट का उसे तभी अहसास होगा जब वह खुद आग की आंच महसुस करेगा। बहुत से मां बाप है जो अपने Level के अनुसार बच्चे का व्यवहार चाहते है जो बच्चे के future के लिये नुकसानदायक है।

मां

 माँ की दुआएं ✍️ लेखिका: Anita Gahlawat जिसने थामे रखा हर तूफ़ान में मुझे, वो ममता की छाँव — माँ लगती है। ना सोई खुद, मगर मेरी नींद बचाई, हर लोरी में उसकी दुआ लगती है। भूखी थी मैं, तो खुद ने खाया नहीं, हर निवाले में उसकी सदा लगती है। जब भी डगमगायी मैं राहों में कहीं, उसकी आहट ही मेरी दिशा लगती है। दूर हूँ अब, मगर दिल के पास है, हर धड़कन में वो ही हवा लगती है। दुनिया कहे या ना कहे कुछ भी, माँ की मोहब्बत ही खुदा लगती है। सो जाते है जब अपनें गहरी नींद में... प्यार का सागर ही सूख जाता है....