सफर
राह गुजर रही है सफर की
तेजी से चल रही है रफ्तार....
मुझसे कोई गलती न हो
यही रहेगी दरकार.....
मुसीबत में काम आऊं किसी के
यहीं चाहत है रूसवा न हूं
जिन्दगी का सफर पूरा कर लू हंस के।
* * * *
जिन्दगी के पन्नो में
वो पाठ था ही नहीं सफर का,
जो जमानें से सबक पाकर पढा है।।
* * * *
जो पाठ जमाना पढाता है वो
अकसर किताबों में नहीं होता
तेजी से चल रही है रफ्तार....
मुझसे कोई गलती न हो
यही रहेगी दरकार.....
मुसीबत में काम आऊं किसी के
यहीं चाहत है रूसवा न हूं
जिन्दगी का सफर पूरा कर लू हंस के।
* * * *
जिन्दगी के पन्नो में
वो पाठ था ही नहीं सफर का,
जो जमानें से सबक पाकर पढा है।।
* * * *
जो पाठ जमाना पढाता है वो
अकसर किताबों में नहीं होता
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