नजर नजर की देख नई शायरी

कुछ तो कशीश है इन अजनबी लोगो में
यू हीं नहीं दोस्त बनकर रूह में बस जातें हैं


         * * * *



नजर नजर की देख है
जिसने जैसा जाना
वही किरदारों की देख है।


   

         *  *  *  *



मत कर इतने हसीं सितम
गैर नहीं तेरे अपने है हम
राज छिपा है दिल में
उसमें बस तुम ही तुम


         *  *  *  *

कई बातें नजर की निगाहें से पढी जाती हैं
ओर अच्छे व्यवहार का आधार भी इन से है।।












Comments