दास्ता हसरतों की

अजीब दास्तां है इन हसरतों की
अजनबी हाल पूछ रहें है ओर
अपनों को खबर भी नहीं......

        *  *  *  *




मुङकर क्या देखना जब चल ही दिये
उन मंजरो से भी निपटना है जो रास्ते में मिलेंगे

         *  *  *  *




सोच लेते है हर खीश दिल की हसरत से
चाहत के आईने से वाकिफ नहीं हो तुम

         *  *  *  *

Comments