Pti patni pr hindi kavita:-पति पत्नी एक सुखद अहसास:


शीर्षक

"दिल की शहनाइयों में सजदा – पति-पत्नी के रिश्ते की गहराई"
(Writer: Anita Gahlawat)


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प्यार, रिश्ते और जीवन – ये तीनों मिलकर इंसान के सफ़र को खूबसूरत भी बनाते हैं और चुनौतीपूर्ण भी। पति-पत्नी का रिश्ता ऐसा ही एक बंधन है, जिसमें हंसी भी है, तकरार भी है, दूरी भी है और अपनापन भी। यह रिश्ता केवल दो लोगों का साथ नहीं बल्कि दो आत्माओं का मिलन है, जहाँ हर धड़कन, हर सांस और हर अहसास एक-दूसरे से जुड़ जाते हैं।

अनिता गहलावत की यह कविता “दिल की शहनाइयों में सजदा” सिर्फ़ भावनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि हर उस दंपत्ति की कहानी है जो ज़िंदगी की राह पर साथ चलते हैं। इसमें कहीं तन्हाई का दर्द है, कहीं दूरी की कसक है, तो कहीं एक-दूसरे का सहारा बनने की ताक़त भी है।

कविता में एक-एक पंक्ति रिश्ते की सच्चाई और सुंदरता को उजागर करती है —
कभी प्रेम जन्नत-सा लगता है, तो कभी तन्हाई वीरान-सी।
कभी मुस्कान से सारा दर्द दूर हो जाता है, तो कभी धड़कनों की रुकावटें बेचैनी का आईना बनती हैं।


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1. रिश्ते का पवित्र बंधन

कविता की शुरुआत एक सुंदर पंक्ति से होती है —
“दिल की शहनाईयों में एक नाम सजदा है, उस नाम में ही मेरा नाम मिलता है।”

यह पंक्ति बताती है कि प्यार में नाम अलग नहीं रहते, बल्कि एक हो जाते हैं। पति-पत्नी का रिश्ता ऐसा ही होता है, जिसमें पहचान भी साझा हो जाती है और ज़िंदगी भी। यह केवल सामाजिक बंधन नहीं बल्कि ईश्वर द्वारा रचा गया पवित्र बंधन है, जो हर सुख-दुख में साथ निभाने का वचन देता है।


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2. प्यार में तन्हाई भी शामिल

कवि कहती हैं कि प्यार हमेशा हंसी-खुशी का नाम नहीं है, उसमें कभी तन्हाई भी होती है।
“कभी वे तन्हा हैं, कभी मैं तन्हा हूँ।”

यह पंक्ति रिश्ते की सच्चाई को दर्शाती है। जीवन में ऐसे पल आते हैं जब दोनों साथ होते हुए भी अकेलेपन का अनुभव करते हैं। यह अकेलापन ही रिश्ते की गहराई को समझाता है — क्योंकि उसी समय हम एक-दूसरे की अहमियत को और ज्यादा महसूस करते हैं।


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3. जन्नत और वीरानी – दोनों पहलू

प्रेम का रिश्ता कभी जन्नत बन जाता है, तो कभी वीरान। यह द्वंद ही इसे वास्तविक और गहरा बनाता है।
“कभी वीरान है, कभी जन्नत – यही प्यार की गहराई है।”

जीवन की परिस्थितियां बदलती रहती हैं। कभी काम का बोझ, कभी समय की कमी, तो कभी गलतफहमियां दूरी पैदा कर देती हैं। लेकिन अगर रिश्ता सच्चा हो, तो वही वीरानी एक दिन जन्नत का रूप ले लेती है।


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4. धड़कनों और भावनाओं का मिलन

प्यार केवल शब्दों से नहीं बल्कि धड़कनों से भी जुड़ा होता है।
“रुकी-सी हैं धड़कनें जब तू बैचैन है, यही पति-पत्नी का बंधन और सुख-चैन है।”

यहाँ कवि यह बताती हैं कि जब जीवनसाथी बेचैन होता है, तो उसकी पीड़ा दूसरे तक भी पहुँचती है। यही रिश्ते की सबसे बड़ी खूबी है — सुख-दुख साझा हो जाते हैं।


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5. लेख और जहां की कहानी

कविता के बीच का हिस्सा रिश्ते को और गहराई देता है।
“वो लेख हैं सुनहरे जज्बातों का, मैं उसी लेख की कहानी हूँ।
एक जहां में वे शामिल हैं, मैं उसी जहां की दीवानी हूँ।”

यहाँ कवि यह मानती हैं कि उनका जीवनसाथी उनके जहां का केंद्र है। उनका अपना अस्तित्व, उनके जज्बात सब उसी साथी से जुड़े हुए हैं।


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6. दूरी और मीठा अहसास

जीवन में कई बार पति-पत्नी को काम या परिस्थितियों के कारण दूर रहना पड़ता है।
“इन दूरियों में भी एक मीठा अहसास है, दूर होकर भी हर मोड़ पर आपस का साथ है।”

यह पंक्तियां बहुत गहरी हैं। ये बताती हैं कि असली प्यार दूरी से कम नहीं होता, बल्कि और मजबूत हो जाता है। दूरी के बावजूद एक-दूसरे का साथ हर पल महसूस होता है।


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7. धरती और आसमान का मिलन

अंत में कवि रिश्ता धरती और आसमान से तुलना करती हैं।
“हम धरती बिन आसमां अधूरा, वैसे ही साथी हम।”

यहाँ यह साफ़ होता है कि पति-पत्नी का रिश्ता अधूरा नहीं रह सकता। जैसे धरती बिना आसमान अधूरी है, वैसे ही एक बिना दूसरे का जीवन अधूरा है।


कविता - १




दिल ‌की‌  ‌शहनाईयों में ‌एक नाम ‌सजदा है
‌उस ‌नाम ‌में ‌ही ‌मेरा ‌नाम ‌मिलता है।
‌बहुत ‌प्यारा बनाया  रब ने एक रिश्ता
उसी रिश्ते के नाम में ‌ही ‌हमारा रिश्ता मिलता है। ।

प्यार ‌की ‌करवटों ‌में ‌अनकही ‌सी एक ‌‌तन्हाई है
‌कभी ‌वे ‌‌तन्हा है ‌कभी ‌मॆ ‌तन्हा ‌हूं।
‌शायद ‌बनाने ‌वाले‌ ने ‌ये ‌ही ‌‌‌रीत ‌बनाई है
‌कभी ‌वीरान है ‌कभी ‌जन्नत ‌ये ‌ही प्यार ‌की ‌गहराई है।।

‌तुम्हारे ‌दुख में ‌म ‌‌दुखी ‌हूं ‌सुख ‌में ‌सुखी
तुम्हारी ‌हंसी में ‌‌‌‌ही मेरी ‌हंसी शामिल है।
‌रुकी ‌सी हैं ‌धङकनें ‌जब ‌तु ‌बैचैन है
ये ‌ही ‌पति ‌पत्नी ‌का ‌बंधन ‌ओर ‌सुख ‌चॆन है।।

‌वो ‌लेख हैं ‌सुनहरे जज्बातो ‌का
‌मॆं ‌उ‌सी ‌लेख ‌की ‌कहानी ‌‌हूं।
‌एक जहां ‌में वें शामिल है
मैैं ‌उसी ‌जहां की दीवानी हूँ ।।

‌आये थे ‌मिलनें यहाँ ‌मीलों ‌का ‌रास्ता ‌पार ‌कर ‌के
‌पर ‌अकेले ‌हम‌‌ अकेले ‌तुम।
‌कभी ‌काम ‌का ‌तगाजा था ‌कभी समय का ‌सितम
‌वर्ना ‌कहां ‌रहते ‌दूर हम ‌ओर ‌तुम।।

इन ‌दूरियों ‌में भी एक मीठा अहसास है
दूर होकर भी ‌हर ‌मोङ ‌पर ‌आपस का साथ है।
‌धूप ‌छांव ‌के ‌साथी ‌हैैं एक ‌‌राह ‌के ‌हमराही ‌हम
‌धरती ‌बैगर ‌आसमां ‌अधूरा ‌वैसे ‌ही साथी  ‌हम।।

‌दिल ‌की ‌गहराईयों ‌मे एक नाम ‌सजदा है
‌उस ‌नाम ‌में ‌ही ‌मेरा ‌नाम ‌मिलता है।
‌बहुत ‌प्यारा ‌बनाया ‌रब ‌ने ‌एक ‌रिश्ता
‌उसी ‌रिस्ते ‌के ‌नाम ‌‌में ही ‌हमारा ‌रिश्ता ‌मिलता है।।


Writer:-@Anita Gahlawat







2) कविता -२


पति-पत्नी का साथ- सुंदर अहसास 


चलते हैं दो कदम संग, बनती है एक ज़िंदगी,
कभी तू मेरी मज़बूरी, कभी मैं तेरी बंदगी।

कभी बहस, कभी हँसी, तो कभी आँखों में पानी,
फिर भी ना छूटे हाथ, यही है असली कहानी।

वो सुबह की चाय में तेरा इंतज़ार,
और रात की रोटी में तेरा प्यार।

न तू अधूरी, न मैं अकेला,
साथ चलें तो हर मौसम लगे नया-सा मेला।

कभी मैं थक जाऊँ तो तू सहारा बन जाए,
तेरा मन टूटे तो मेरी मुस्कान साथ निभाए।

जीवन की हर मुश्किल में जब दो दिल साथ चलें,
तो हर दर्द भी फूल लगे, हर राह आसान बने।

-Anita Gahlawat 










कविता -३

 "वो साथ…"


 Anita Gahlawat 

वो कहता नहीं — फिर भी समझता है,
मैं जताती नहीं — फिर भी हर एहसास पढ़ लेता है।

ना हम परियों जैसे हैं,
ना कोई फ़िल्मी कहानी है हमारी,
पर हर रोज़, छोटी-छोटी बातों में
एक गहराई बसती है — हमारी।

कभी मैं चुप होती हूँ,
तो वो बिना बोले चाय रख देता है,
कभी वो थका होता है,
तो मैं उसकी आंखों में सुकून रख देती हूँ।

हम लड़ते भी हैं,
पर रूठ कर भी पास बैठते हैं,
क्योंकि हमें जाना नहीं —
हमें निभाना आता है।







🌹 विस्तृत भावार्थ 

यह कविता केवल पति-पत्नी के रिश्ते का गुणगान नहीं करती, बल्कि यह जीवन का सत्य भी कहती है —

प्यार में सुख और दुख दोनों शामिल हैं।

रिश्ते में तन्हाई और दूरी भी है, लेकिन इन्हीं में अपनापन और गहराई छिपी है।

असली साथी वही है जो हर मुश्किल, हर तकलीफ और हर मुस्कान में साथ खड़ा रहे।

यह रिश्ता सिर्फ़ दो लोगों का नहीं बल्कि दो आत्माओं का है, जो धड़कनों, सांसों और भावनाओं से एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं।


अनिता गहलावत की लेखनी रिश्तों को बहुत ही आत्मीय और सहज अंदाज़ में प्रस्तुत करती है। उनकी कविताओं में घरेलू जीवन, प्रेम की सच्चाई और मानवीय संवेदनाओं की झलक मिलती है।


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 निष्कर्ष

पति-पत्नी का रिश्ता एक जीवनभर का सफ़र है। यह केवल विवाह का बंधन नहीं बल्कि आत्माओं का मिलन है। इस रिश्ते में कभी तकरार, कभी दूरी, कभी तन्हाई तो कभी जन्नत-सा सुख भी है।

अनिता गहलावत की कविता “दिल की शहनाइयों में सजदा” इस रिश्ते की संपूर्णता को दर्शाती है। इसमें प्रेम की गहराई, दूरी की कसक, तन्हाई का दर्द और साथ की मिठास – सब कुछ है।

यह कविता हर उस इंसान के दिल को छू लेती है, जिसने प्यार को जिया है, रिश्ते को समझा है और अपने जीवनसाथी के साथ इस अनमोल बंधन को महसूस किया है।


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