Dosti:-एक पॆगाम ‌रुठे दोस्त के नाम

आज भी महसूस किया गरूर तेरे अन्दर
मत अपने को देखकर घमंड कर।
ना मॆं कल कम था ना आज
बस दोस्ती का हाथ बढाया था
सब भूल कर ।।

कभी तुम ने सलाह की होगी
कभी मेनें रजामंदी चाही होगी।
गुजर जाते हैं कब वक्त पता नहीं
रूसवा रहकर भी इस तरह जीना नहीं ।।
True sayari


जरुरी नहीं हर रिश्ता प्यार का हो
दुश्मनी अच्छी ओर वाजिब हो तो
 कोई गम नहीं।
लेकिन बे वजह किसी से मुंह फेर
लेना भी ठीक नहीं ।।

दोस्ती भले मत करो पर
नफरत भी सहन नहीं कर सकते।
अपने कहने को बहुत रिश्ते नाते हैं
किसी एक के लिए नहीं जला करते ।।


अच्छे लोग अच्छे दोस्त एक बार हाथ
बढाते हैं बार बार  नहीं बढाया करते ।
समझ गया जो समय पर वो फालतू में
स्वाभिमान को आगे नहीं लाया करते ।।

बन जाते हैं पराये भी अपने यू हि नहीं
उनके विचार दमदार होते हैं।
जो नहीं पहचान पाता अपनी भलाई को
सच्च में पागल होते हैं। ।

इसलिए मत सन्नाटा पॆदा कर दोस्ती के
बीच मनमुटाव ला कर।
अनसुलझे रिश्ते अपना वजूद खो देते हैं
घमंड को पा कर।।


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Dosti par shayari 


नये लोगो से दोस्ती ओर प्यार-प्रेम
बढाना बुराई नहीं है
बुराई तो उसमें हैं जो पुरानी दोस्ती
को दरकिनार कर देते हैं


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कई लोग बीच में आकर
हर छोटी-सी वजह को
गुनाह का आकार दे देते हैं.....




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हम तो उनको अच्छा दोस्त समझ बैठे
समय के साथ पता चला वो तो
       दोस्ती थी ही नही




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दोस्त वो नहीं जो छोटी-छोटी बातो से
         जलन निकाले
दोस्त तो वो है जो छोटी-छोटी बातों से
         हमदर्दी निकाले



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