Hindi kavita:- इन्तजार की मुलाकात
कोशिशें की तुम तक पहुंचने की बहुत
क्या हसीन मुलाकात थी ।
मेरे को नहीं मालूम था चाहत तुम्हें भी थी
मुझ तक पहुँचने की।।
बातें शुरु हुई तो समंदर से टूट पङे
लहरें बेकाबू थी।
खुशी बुलंद थी खबर सुनकर मेरे दोस्त
तेरे आने की।
मस्त हवाओं में शबाब - सा उमङ पङा
झोंके आए हो खुशबुओ के जॆसे।
पल आया ओर रुक गया
समां पागल बन गया हो जॆसे।।
रखना तुम नज़राना सहेज कर
इन प्यारे लम्हों का।
साथ निभाना हंसकर हमेशा लम्बा
सफर तय करने का।।
बेताब जुगनू यू ही नहीं बने अंधेरी
रातों के सोदागर।
कुछ तो बात है उनमें यू हीं नहीं उन्हें
चमक का गरुर ।।
आजमाया है दिल को बहुत कभी दिमाग के
वश में नहीं आया।
दिमाग तो कठपुतली है हालात का ये वही
करता है जो दिल ने कराया।।
क्या हसीन मुलाकात थी ।
मेरे को नहीं मालूम था चाहत तुम्हें भी थी
मुझ तक पहुँचने की।।
बातें शुरु हुई तो समंदर से टूट पङे
लहरें बेकाबू थी।
खुशी बुलंद थी खबर सुनकर मेरे दोस्त
तेरे आने की।
मस्त हवाओं में शबाब - सा उमङ पङा
झोंके आए हो खुशबुओ के जॆसे।
पल आया ओर रुक गया
समां पागल बन गया हो जॆसे।।
रखना तुम नज़राना सहेज कर
इन प्यारे लम्हों का।
साथ निभाना हंसकर हमेशा लम्बा
सफर तय करने का।।
बेताब जुगनू यू ही नहीं बने अंधेरी
रातों के सोदागर।
कुछ तो बात है उनमें यू हीं नहीं उन्हें
चमक का गरुर ।।
आजमाया है दिल को बहुत कभी दिमाग के
वश में नहीं आया।
दिमाग तो कठपुतली है हालात का ये वही
करता है जो दिल ने कराया।।
-Anita Gahlawat
कहीं कुछ अधूरा सा
✍️ लेखिका: Anita Gahlawat
कुछ पल थे जो ठहर नहीं पाए,
कुछ सपने थे जो बिखर गए।
कुछ चेहरे मुस्कुराते रहे,
पर अंदर से शायद डर गए।
कुछ बातें दिल में ही रह गईं,
कुछ चुप्पियाँ आवाज़ बन गईं।
कभी-कभी यूँ भी होता है,
जैसे रूह थककर रुक जाती है कहीं…
कभी लगता है…
कहीं कुछ अधूरा सा है,
जैसे पूरी होकर भी कुछ अधूरी सी कहानियाँ हैं।
जैसे कोई अपनी ही परछाई से
दूरी बना रहा हो…
शब्द हैं, पर शांति नहीं,
आँखें हैं, पर नींद नहीं।
दिल धड़कता है रोज़ सुबह,
पर जीने की वजह ठहरती नहीं।
हर दिन एक सवाल बनकर आता है —
क्या सब ठीक है?
या फिर…
कहीं कुछ अधूरा सा है?
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