"एक हसरत थी तुझसे बात करने की — Anita Gahlawat की प्रेम कविता"
"अनकहे जज़्बातों की पुकार — इस कविता में एक अधूरी मोहब्बत की वो कसक है, जो दिल में दबे जज़्बातों को जुबां तक लाने की हसरत से जन्म लेती है। 'एक हसरत थी तुझसे बात करने की' सिर्फ एक पंक्ति नहीं, बल्कि एक अधूरे मिलन की पूरी कहानी है, जिसमें चाहत है, डर है, इज़्ज़त है — और इंतज़ार है उस एक लम्हे का, जब दिल की बातें बिन कहे समझ ली जाएँ।"
यह कविता बेहद भावुक और आत्मा को छू लेने वाली है। इसमें एक ऐसे व्यक्ति की पीड़ा और चाहत व्यक्त की गई है जो अपने दिल की अनकही बात को सामने वाले तक पहुंचाना चाहता है, मगर रिश्ते की मर्यादा, संकोच और गलतफहमी के डर से चुप है। हर पंक्ति में प्रेम है, आदर है, और गहराई है। कविता धीरे-धीरे एक एकतरफा भावना से निकलकर आपसी जुड़ाव की विनती तक पहुंचती है — जो इसे एक पूर्ण प्रेम-प्रस्ताव की तरह बना देती है।
"अनकहा प्यार"- हिंदी रोमांटिक कविता
एक हसरत थी तुझ-से बात करने की
दिल की अनकही बातों को जुबां
पर लाने की।
हिम्मत तो जुटाई रूबरू होने के लिए
पर जिगर में वो ठेस बाकी थी कुछ
न कहने की।
इस सीने की तङफ लहजे से नहीं बताई
जाती ना आवारगी आती आँखों से
गुफ्तगु करने की।
दिल की अनकही बातों को जुबां
पर लाने की।
हिम्मत तो जुटाई रूबरू होने के लिए
पर जिगर में वो ठेस बाकी थी कुछ
न कहने की।
इस सीने की तङफ लहजे से नहीं बताई
जाती ना आवारगी आती आँखों से
गुफ्तगु करने की।
एक हसरत थी तुझ-से बात करने की
दिल की अनकही बातों को जुबां
पर लाने की।
कभी हम नहीं मिले कभी लब्जों ने साथ
नहीं दिया वरना चाहत थी बहुत कुछ
कहने की ।।
आंखे मिली तो निगाहें शरीफ बन गई
नहीं इजाजत दी प्यार से इबादत
करने की।
दिल की अनकही बातों को जुबां
पर लाने की।
कभी हम नहीं मिले कभी लब्जों ने साथ
नहीं दिया वरना चाहत थी बहुत कुछ
कहने की ।।
आंखे मिली तो निगाहें शरीफ बन गई
नहीं इजाजत दी प्यार से इबादत
करने की।
एक हसरत थी तुझ-से बात करने की
दिल की अनकही बातों को जुबां
पर लाने की।
जहन में सीर्फ तुम हो तुमसे ही तल्ख
होना है!
दिल की अनकही बातों को जुबां
पर लाने की।
जहन में सीर्फ तुम हो तुमसे ही तल्ख
होना है!
जरूरत है तेरे सीने में प्यार
भरने की ।
मन तो बहुत है पल में आ जाउं पास
तेरे तुम भी सुनाओं अनकही दास्तान
अपने दिल की।
भरने की ।
मन तो बहुत है पल में आ जाउं पास
तेरे तुम भी सुनाओं अनकही दास्तान
अपने दिल की।
एक हसरत थी तुझ-से बात करने की
दिल की अनकही बातों को जुबां
पर लाने की।
डर है मैं कुछ कह दूं ओर तुम गलत
समझ बैठों दिल में इज्जत है वर्ना परवाह
नहीं जमानें की।
एक लम्हा बाकी है एक चाहत अधूरी है
एक दिल है जो नीलाम है एक मन्नत है
तुझे पाने की।
दिल की अनकही बातों को जुबां
पर लाने की।
डर है मैं कुछ कह दूं ओर तुम गलत
समझ बैठों दिल में इज्जत है वर्ना परवाह
नहीं जमानें की।
एक लम्हा बाकी है एक चाहत अधूरी है
एक दिल है जो नीलाम है एक मन्नत है
तुझे पाने की।
एक हसरत थी तुझ-से बात करने की
दिल की अनकही बातों को जुबां
पर लाने की।
हमारा रिश्ता है जन्मों का बंधन
फिर कैसे ना करें हम बात तुम्हारे
साथ चलने की ।
कहदो ना तुम भी दो लफ्ज प्यार से
जरूरत है मुझे भी तेरे साथ चलने की ।।
दिल की अनकही बातों को जुबां
पर लाने की।
हमारा रिश्ता है जन्मों का बंधन
फिर कैसे ना करें हम बात तुम्हारे
साथ चलने की ।
कहदो ना तुम भी दो लफ्ज प्यार से
जरूरत है मुझे भी तेरे साथ चलने की ।।
एक हसरत थी तुझ-से बात करने की
दिल की अनकही बातों को जुबां
पर लाने की।
पर लाने की।
Anita Gahlawat
"यह कविता उन सभी दिलों की आवाज़ है जो चाहकर भी कभी अपने एहसास शब्दों में नहीं ढाल पाए। इसमें अनकहे इकरार की सच्चाई है, रूहानी जुड़ाव की मासूमियत है और उस रिश्ते की कसक है, जिसे समाज नहीं, दिलों ने चुना है।"
Waah
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