मेरी कविता मेरा भारत
क्या कमाल ट्रेन का सफर है।
कितनी मनमोहक यथार्थ खूबसूरती है इस देश में ।
देखते है नजारा खिङकी से तो लगता है
लोग इस जमीं को छोङकर क्या देखने जाते हैं विदेश में।।
खेतों में घास चरते मवेशी,
दूर से दिखते बङे पॆङ
घर के आगे ठहरे पानी में मछली पालन
कहीं धुआँ कहीं ट्रेफिक
सफर को ओर भी मोहक बना देते हैं।
नदियों में नहाते लोग
मदानों में खेलते बच्चे
काम में लगी ऒरतें
खेतों की मेङो पर चलते किसान
भारत के सफल भविष्य को जगा देते हैं।
गावों की क्या बताऊं
गावों का तो नजारा ही न्यारा है।
लेट लतीफ ट्रेन बेशक चलो
पर भारत हद से ज्यादा प्यारा है।।
दो दिन हुए बैठे ट्रेन में
गुहाटी से दिल्ली
रास्ता खत्म होने का नाम नहीं
ओर
उधर चाइना पाकिस्तान बोलते हैं
हम हिन्दुस्तान को मिटा देंगे।
वें नहीं जानते भारत की सर-जमीं के आगे
तुम्हारे तरकस जवाब दे देंगे ।।
इतना जिगरा नही उन जालीछाप कपटि्टयों में
जो भारत को बर्बाद कर देंगे।।
कितनी मनमोहक यथार्थ खूबसूरती है इस देश में ।
देखते है नजारा खिङकी से तो लगता है
लोग इस जमीं को छोङकर क्या देखने जाते हैं विदेश में।।
खेतों में घास चरते मवेशी,
दूर से दिखते बङे पॆङ
घर के आगे ठहरे पानी में मछली पालन
कहीं धुआँ कहीं ट्रेफिक
सफर को ओर भी मोहक बना देते हैं।
नदियों में नहाते लोग
मदानों में खेलते बच्चे
काम में लगी ऒरतें
खेतों की मेङो पर चलते किसान
भारत के सफल भविष्य को जगा देते हैं।
गावों की क्या बताऊं
गावों का तो नजारा ही न्यारा है।
लेट लतीफ ट्रेन बेशक चलो
पर भारत हद से ज्यादा प्यारा है।।
दो दिन हुए बैठे ट्रेन में
गुहाटी से दिल्ली
रास्ता खत्म होने का नाम नहीं
ओर
उधर चाइना पाकिस्तान बोलते हैं
हम हिन्दुस्तान को मिटा देंगे।
वें नहीं जानते भारत की सर-जमीं के आगे
तुम्हारे तरकस जवाब दे देंगे ।।
इतना जिगरा नही उन जालीछाप कपटि्टयों में
जो भारत को बर्बाद कर देंगे।।
Anita Gahlawat
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