Hindi kavita:-भ्रष्ट ‌‌कॊन ‌कॊन

कितने ‌भ्रष्ट हैं ‌लोग यहाँ ‌
क्या ‌कहना ‌भ्रष्टाचार का।
‌छापे ‌तो ‌कभी ‌कभार ‌गिरा ‌करते हैं।
उसमें ‌भी ‌सब‌ ‌राजनेता ‌नही ‌फसा ‌करते हैं।।
‌कुर्सी वाले ‌खुब ‌मजे ‌लेते हैं
 विपक्ष ‌की ‌लाचारी ‌का।।।


‌‌‌‌पावर जितनी ‌ ऊँची
छोटी ‌पर ‌जोर ‌आजमाईश ‌करे।
‌जितना ‌दबदबा बना ‌सके
दबाने ‌की ‌पूरी ‌कॊशिश ‌करे।।
खा ‌जा‌ते है ‌गरीब का हक ‌भी
‌कभी ‌पेट भरके खाना ना खा सके।।।

True thoughts

कभी ‌मान में ‌कभी ‌सम्मान में
‌ओहदे ‌वाले ‌‌भी ‌पिछे नहीं।
सब तो ‌नही ऎसे भ्रष्ट
फिर भी कम नहीं ।।
ईमानदारी से काम करे तो
डेवलपमेंट कब ‌तक ‌नहीं।।।


कानून ओर ‌नियम ‌भी ‌कहने ‌को
‌एक हैं पर ‌सबके ‌‌लिये एक नहीं ।
‌कोई ‌गुनाहों ‌का भरा पुलिन्दा है
‌फिर भी कोई ‌जुर्म ‌नहीं।।
‌सीधे-साधे ‌लोगो पर ‌का‌नून ‌बनते हैं
‌मुजरिम ‌तो ‌गिरफ्त हुआ  ही नहीं ।।।


चम्मचागिरी ‌ओर ‌चापलुसी ‌में ‌माहिर ‌
बन्दो ‌की भी ‌कमी ‌नहीं।
‌ईमानदारी ‌से ‌काम ‌करने ‌वालो
‌की कही खरियत ‌ नहीं ।।
‌‌बेईमानी से ढके है ‌लोग ‌ इतने
‌के खुद पर ‌ही ‌य‌कीन ‌नहीं।।।


‌सियासत ‌की ‌गलियां ‌तंग ‌हो ‌जाती हैं
जब आवाम एक साथ ‌चले।
‌अक्सर ‌चुपके ‌से कही ‌चिंगारी ‌सुलगा
‌देते हैं जब हवा ‌प्रेम ‌की ‌भवे।।
बना ‌के ‌कार्यकर्ता ‌भिङा के ‌जन‌ता ‌को
खुद ‌पतली ‌ग‌ली ‌से ‌निकल ले।।।




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