‌ risto pr hindi kavita:-किसे कहे अपना -हिन्दी कविता

मीठी- ‌‌मीठी हवा का ‌झोंका
‌कुछ ‌याद‌ ‌करा गया...
अपने कहें जाने ‌वा‌ले ‌रिस्तो ‌का
अहसास करा  गया।


‌व्यंग्य-सा कस ‌ग‌या ओर कह गया
कॊन ‌ह ‌तेरा ‌अपना
‌कॊन ह तेरा ‌पराया
‌दुनियां को समझने ‌की ‌हिम्मत ‌दिला ‌‌ग‌या।

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करार था उन‌का ‌तुझसे बातें न ‌करने का
‌मतलबी थे वे रिश्ते
जिनमें मतलब था
‌ये ‌पहला ‌कदम था अपना न ‌होने का


तुम ‌जिसे ‌अपना ‌समझते थे
‌वो ‌कब‌‌ ‌से ‌दुनिया में ‌शामिल थे‌‌।
गेंहु ‌ओर ‌‌भूसे ‌का ‌भाव ‌बताने ‌वाले
‌‌तुम्हारी ‌सोच में ‌‌ही ‌तुम्हारे थे
‌अपने ‌‌वजूद ‌के ‌होने ‌का ‌ख्याल ‌करा ‌ग‌या।।
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‌तुम ‌‌तो ‌चले थे खुशी से अपना ‌आशियाना ‌बनाने
‌ते‌रे ‌अपनो ‌ने ‌तो‌ ‌आंगन में ‌ही ‌तेरी ‌टांग ‌खीची ‌थी।
‌जब ‌जरूरत ‌पङी ‌थी ‌उनकी ‌मदद ‌की
‌तो ‌हर ‌चीज ‌की ‌किमत वसूली थी। ।


गुस्सा ‌आया तुम्हें तो
उस गुस्से का भी ‌मोल ‌लगा गये
‌पॆसे ‌की‌ ‌खातिर ‌गुस्सा ‌आ ‌रहा है
‌कहकर ‌सारी ‌इंसानियत ‌ही ‌भूला गये ।
‌तेरे ‌अपने‌ ‌ही ‌अपने ‌होने ‌का
‌ख्याल ‌मिटा गये ।।


छोटी छोटी चीज़ ‌छुपाई कहां ‌तुम ले जाने वाले थे।
‌घर ‌का ‌नक्सा ‌बदल दिया ‌तुमने उनको ‌खुश ‌करने में
‌वो कहा ‌तुम्हे ‌ओर ‌‌तुम्हारे ‌दिल ‌को  समझने ‌वाले थे। ।


मीठी ‌मीठी ‌हवा ‌का ‌झोंका
कुछ याद करा ‌‌ग‌‌या.....
अपने ‌‌कहे ‌जाने ‌वाले ‌रिश्तो का
‌अहसास ‌करा ‌ग‌या।

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