Posts

Showing posts from November, 2018

शायरी

दो लोगो का पास बैठना कहां पसंद होगा दूनियां को, परिंदो का मिलन ही बर्दास्त नहीं पत्थर मार कर उङा देते है

कलम की ताकत

अनसमझों ने तो इतिहास लिखा है समझदारों ने तो बस उनको पढा है *** इन इतिहासकारों में क्या बात थी जाने के बाद सदियां दोहराती हैं *** दूनियां में कलम के खरीदार बहुत है पर नसीब में किसी किसी के आती है *** कलम दिल कि सरगमीं ओर कामयाबी लिखती है दूनियां को अच्छी-बुरी राहों से वाकिफ कराती है *** कलम के वार कलम जब इरादों से लहराती है, तो सल्तनतों की नींव हिला जाती है। स्याही का हर कतरा जब जाग उठता है, तो सोया हुआ सच भी चिल्ला उठता है। स्याही में अगर हक़ का रंग घुल जाए, तो पत्थर भी सच बोलने लग जाए। एक लकीर खिंच जाए अगर ईमान से, तो समय भी झुक जाए उस विधान से। कलम का वार खामोश होता है, पर सदियों तक गूंजता रहता है। तलवारें जिसको काट नहीं पातीं, वो दीवारें ये छूकर गिरा देती है। तलवारें लड़ाई जीत सकती हैं, कलम पूरी दुनिया बदल सकती है। खून से लिखी दास्तां फीकी पड़ जाती है, पर स्याही से लिखी अमर हो जाती है। जिस हाथ में कलम और दिल में ईमान हो, उसके शब्द ही सबसे बड़ा ऐलान हो। ये न मुकद्दर बेचती है, न डर से झुकती है, ये बस सच की राह पे चलती है। लिखेंगे कुछ ऐसा, कि पन्नों से उड़कर हवा मे...